UP Bhulekh: घर बैठे मोबाइल से कैसे निकालें अपनी जमीन की खतौनी?

UP Bhulekh Real Time Khatauni: उत्तर प्रदेश में जमीन के रिकॉर्ड देखने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और सटीक हो गई है। 

अगर आपको अपनी जमीन की ‘नकल’ चाहिए या यह चेक करना है कि खतौनी में आपका नाम सही है या नहीं, तो अब आपको लेखपाल के पीछे घूमने की जरूरत नहीं है।

उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने अपने डिजिटल पोर्टल (upbhulekh.gov.in) को 2026 की नई तकनीक के साथ अपडेट कर दिया है। अब पुराने ‘अधिकार अभिलेख’ के बजाय ‘रियल टाइम खतौनी’ देख सकते हैं। 

अब आप बिना तहसील का चक्कर लगाए, सिर्फ 2 मिनट में अपने मोबाइल से यह नकल कैसे निकाल सकते हैं।

यूपी भूलेख पोर्टल क्या है?

राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व परिषद ने Bhulekh UP पोर्टल (upbhulekh.gov.in) शुरू किया है। 

2 मई 2016 से शुरू इस डिजिटल सेवा के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे खसरा-खतौनी नकल, अधिकार अभिलेख, भू-नक्शा, गाटा संख्या और भूमि उपयोग की जानकारी ऑनलाइन देख सकते हैं।

घर बैठे मोबाइल से खतौनी कैसे देखें? (Step-by-Step)

  1. वेबसाइट ओपन करें: अपने मोबाइल के गूगल सर्च में लिखें upbhulekh.gov.in और पहली वेबसाइट पर क्लिक करें।
  2. सही विकल्प चुनें: होमपेज पर कई बॉक्स दिखेंगे। आपको ‘रियल टाइम खतौनी की नकल देखें’ वाले बॉक्स पर क्लिक करना है। (यही सबसे लेटेस्ट डेटा है)।
  3. अपने क्षेत्र का चुनाव: अब बाएं हाथ पर अपना जिला, फिर तहसील और फिर अपने गांव का नाम चुनें।
    • प्रो टिप: अपने गांव के नाम का पहला अक्षर दबाते ही गांव की लिस्ट छोटी हो जाएगी।
  4. जमीन खोजें: अब आप अपनी जमीन को 3 तरीके से ढूंढ सकते हैं:
    • खसरा नंबर डालकर (अगर पता हो)।
    • खाता संख्या डालकर।
    • नाम के द्वारा (अगर कुछ भी याद नहीं है, तो बस अपना नाम टाइप करें)।
  5. मैजिक बटन दबाएं: नाम चुनने के बाद ‘उद्धरण देखें’ पर क्लिक करें।
  6. हो गया काम: आपकी डिजिटल खतौनी स्क्रीन पर आ जाएगी। आप इसका स्क्रीनशॉट ले सकते हैं या इसे PDF बनाकर सेव कर सकते हैं।

3 जरूरी बातें जो आपको जाननी चाहिए

  • लोन चेक करें: खतौनी के दाएं हिस्से (टिप्पणी कॉलम) को ध्यान से देखें। अगर जमीन पर बैंक से लोन लिया गया है या कोई कोर्ट केस चल रहा है, तो वहां उसकी जानकारी लाल स्याही या डिजिटल नोट में दर्ज होगी।
  • हिस्सा निर्धारण: नए पोर्टल पर अब यह भी साफ दिखता है कि अगर एक ही जमीन के 4 मालिक हैं, तो किसका कितना हिस्सा (अंश) है। इससे भविष्य में झगड़ों की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
  • जरूरी नोट: मोबाइल वाली कॉपी सिर्फ जानकारी के लिए है। अगर आपको सरकारी काम या बैंक लोन के लिए पेपर चाहिए, तो तहसील से ‘डिजिटल सिग्नेचर’ वाली प्रमाणित नकल ही लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या मोबाइल से निकली खतौनी बैंक लोन के लिए मान्य है?

उत्तर: नहीं। मोबाइल से निकाली गई खतौनी केवल आपकी जानकारी (Informational) के लिए है। बैंक लोन, रजिस्ट्री या कानूनी कार्यों के लिए आपको तहसील या जनसेवा केंद्र (CSC) से ‘डिजिटल हस्ताक्षर’ वाली प्रमाणित नकल ही लेनी होगी।

Q2. ‘रियल टाइम खतौनी’ और ‘पुरानी खतौनी’ में क्या अंतर है?

उत्तर: पुरानी खतौनी 6 साल में एक बार अपडेट होती थी। ‘रियल टाइम खतौनी’ का मतलब है कि जैसे ही जमीन की रजिस्ट्री या दाखिल-खारिज (Mutation) होगा, वह तुरंत पोर्टल पर अपडेट हो जाएगा। 2026 में अब इसी का उपयोग प्रमुखता से हो रहा है।

Q3. अगर पोर्टल पर मेरा नाम गलत दिख रहा है, तो क्या करें?

उत्तर: अगर खतौनी में नाम या रकबा (क्षेत्रफल) गलत है, तो आपको तुरंत अपने क्षेत्र के लेखपाल से संपर्क करना चाहिए या ‘राजस्व परिषद’ की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

Q4. क्या खतौनी देखने के लिए कोई फीस देनी पड़ती है?

उत्तर: ऑनलाइन पोर्टल (upbhulekh.gov.in) पर केवल खतौनी देखने या उसे पढ़ने के लिए कोई फीस नहीं लगती। यह पूरी तरह निशुल्क है। हालांकि, प्रमाणित नकल (Certfied Copy) के लिए मामूली सरकारी शुल्क देना होता है।

Q5. अगर गाटा संख्या या खाता संख्या याद न हो तो क्या करें?

उत्तर: घबराएं नहीं! यूपी भूलेख पोर्टल पर ‘खातेदार के नाम द्वारा खोजें’ का विकल्प मौजूद है। आप अपना नाम हिंदी में टाइप करके भी अपनी जमीन का पूरा ब्यौरा निकाल सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल पाठकों की सुविधा के लिए दी गई है। आधिकारिक पुष्टि के लिए हमेशा उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद की वेबसाइट या अपनी तहसील से संपर्क करें।

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