UP Bhulekh Khatauni Codes:
दोस्तों, जब आप UP Bhulekh पोर्टल पर अपनी खतौनी (ROR) देखते हैं, तो वहां ज़मीन के प्रकार के आगे कुछ कोड लिखे होते हैं, जैसे ‘1-क’, ‘2’ या ‘5-1’।
क्या आप जानते हैं कि इन कोड्स का मतलब क्या है? असल में, इन कोड्स में ही छिपा होता है कि आपकी ज़मीन पर आपका अधिकार क्या है- क्या आप उसे बेच सकते हैं? क्या वह सरकारी है? या वह खेती के लिए है ही नहीं?
आज के इस एक्सप्लेनर में हम राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा जारी भूमि प्रकार सूची और उनके यूनिक कोड्स को विस्तार से समझेंगे।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के मुताबिक, हर गाटा (Plot) का एक 16 अंकों का यूनिक आईडी होता है। इस कोड के आखिरी दो अंक (15वें और 16वें स्थान पर) यह तय करते हैं कि वह ज़मीन किस श्रेणी (Category) में आती है।
1. निजी मालिकाना हक वाली भूमि (Private Ownership)
यह वह कैटेगरी है जहां किसान का अपनी ज़मीन पर सबसे ज़्यादा अधिकार होता है।
- कोड 12 (श्रेणी 1-क): यह “संक्रमणीय भूमिधरों” की ज़मीन है। सरल भाषा में कहें तो आप इसके असली मालिक हैं और आपको इसे बेचने, गिरवी रखने या वसीयत करने का पूरा कानूनी अधिकार है। यह निवेश के लिए सबसे सुरक्षित ज़मीन है।
- कोड 21 (श्रेणी 2): यह “असंक्रमणीय भूमिधर” की श्रेणी है। यहाँ आपको खेती का अधिकार तो है, लेकिन आप इसे बेच नहीं सकते। अक्सर सरकार द्वारा पट्टे पर दी गई ज़मीनें इसी श्रेणी में आती हैं।
- कोड 14 (श्रेणी 1-ख): यह भूमि ‘गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट’ के तहत व्यक्तियों के पास होती है।
2. सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की भूमि
खतौनी में अगर नीचे दिए गए कोड दिखें, तो समझ जाइये कि यह सरकारी या ग्राम सभा की संपत्ति है:
| श्रेणी | ज़मीन का विवरण | यूनिक कोड (15-16 अंक) |
| 1-1 | सरकार या ग्राम सभा द्वारा प्रबंधित खेती की भूमि | 11 |
| 6-1 | अकृषिक भूमि – जलमग्न (तालाब, झील, नहर आदि) | 61 |
| 6-2 | स्थल, सड़कें, रेलवे, भवन (सार्वजनिक उपयोग) | 62 |
| 6-3 | कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) | 63 |
3. कृषि योग्य बंजर और परती ज़मीन (Waste Land)
ये वो ज़मीनें हैं जो खेती के लायक तो हैं पर फिलहाल खाली पड़ी हैं:
- कोड 51 (श्रेणी 5-1): नई परती (हाल ही में खाली छोड़ी गई)।
- कोड 52 (श्रेणी 5-2): पुरानी परती (लंबे समय से खाली)।
- कोड 55 (श्रेणी 5-3-ग): स्थाई पशुचर भूमि यानी चरागाह।
- कोड 57 (श्रेणी 5-3-ङ): अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
4. वनाधिकार और विशेष श्रेणियाँ
2006 के वनाधिकार अधिनियम के तहत जनजातियों को दिए गए अधिकार भी कोड्स में दर्ज होते हैं:
- कोड 58: खेती के लिए वनाधिकार।
- कोड 59: आबादी (घर) बनाने के लिए वनाधिकार।
- कोड 60: सामुदायिक वनाधिकार।
5. कब्ज़े वाली ज़मीन (Occupancy Rights)
- कोड 31 (श्रेणी 3): असामियों के अधिकार वाली भूमि।
- कोड 91 (श्रेणी 9): ऐसी ज़मीन जिस पर बिना मालिक की सहमति के कब्ज़ा कर लिया गया हो।
एक्सपर्ट टिप्स:
अपनी खतौनी देखते समय हमेशा गाटा यूनिक कोड के अंतिम दो अंकों का मिलान ज़रूर करें। अगर आपकी खरीदी हुई निजी ज़मीन का कोड ’12’ (1-क) के बजाय कुछ और दिख रहा है, तो बिना देर किए अपने क्षेत्रीय लेखपाल या तहसीलदार से संपर्क करें। गलत श्रेणी दर्ज होने पर भविष्य में रजिस्ट्री (बैनामा) रुक सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
जवाब: इसका मतलब है कि आप उस ज़मीन के मालिक हैं और आपको उसे बेचने या हस्तांतरित करने का कानूनी अधिकार है।
जवाब: नहीं, सामान्य परिस्थितियों में ऐसी भूमि बेची नहीं जा सकती। एक निश्चित समय सीमा के बाद सरकार द्वारा इसे श्रेणी 1-क में बदलने पर ही बेचने का अधिकार मिलता है।
जवाब: कोड 61 (जलमग्न) और 62 (सड़क/रेलवे) सार्वजनिक उपयोग की ज़मीनें हैं। इन पर निजी निर्माण करना अवैध अतिक्रमण माना जाता है।
जवाब: आप उत्तर प्रदेश भूलेख की आधिकारिक वेबसाइट (upbhulekh.gov.in) पर अपने जनपद, तहसील और ग्राम का चुनाव करके खसरा/गाटा संख्या के माध्यम से यह कोड देख सकते हैं।
जवाब: आप तहसीलदार न्यायालय में साक्ष्यों (जैसे सिंचाई की रसीद या मौके की फोटो) के साथ श्रेणी सुधार (अंश संशोधन) के लिए आवेदन कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश – भूमि प्रकार एवं कोड सूची
| क्रम सं. | भूमि प्रकार | भूमि प्रकार का विवरण | भूमि प्रकार का कोड |
| 1 | 1 | ऐसी भूमि, जिसमें सरकार/गाँव सभा या अन्य स्थानीय निकाय खेती करता हो। | 11 |
| 2 | 1-क | भूमि जो संक्रमणीय भूमिधरों (मालिकाना हक) के अधिकार में हो। | 12 |
| 3 | 1-क(क) | रिक्त | 13 |
| 4 | 1-ख | ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के अन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो। | 14 |
| 5 | 2 | भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरों के अधिकार में हो (बेचने का अधिकार नहीं)। | 21 |
| 6 | 3 | भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकार में हो। | 31 |
| 7 | 4 | बिना आगम के अध्यासीनों के अधिकार वाली भूमि (स्तम्भ 4 खाली होने पर)। | 41 |
| 8 | 4-क(क) | अधिकतम जोत सीमा से अर्जित अतिरिक्त भूमि (पट्टेदार के पास)। | 42 |
| 9 | 4-क(ख) | अधिकतम जोत सीमा से अर्जित अन्य भूमि। | 43 |
| 10 | 5-1 | कृषि योग्य भूमि – नई परती (परती जदीद)। | 51 |
| 11 | 5-2 | कृषि योग्य भूमि – पुरानी परती (परती कदीम)। | 52 |
| 12 | 5-3-क | कृषि योग्य बंजर – इमारती लकड़ी के वन। | 53 |
| 13 | 5-3-ख | कृषि योग्य बंजर – अन्य वन (झाड़ियाँ, झुंड आदि)। | 54 |
| 14 | 5-3-ग | कृषि योग्य बंजर – स्थाई पशुचर भूमि (चरागाह)। | 55 |
| 15 | 5-3-घ | कृषि योग्य बंजर – छप्पर छाने की घास और बाँस की कोठियाँ। | 56 |
| 16 | 5-3-ङ | अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। | 57 |
| 17 | 5-क(क) | वन भूमि (वनाधिकार अधिनियम 2006) – कृषि हेतु। | 58 |
| 18 | 5-क(ख) | वन भूमि (वनाधिकार अधिनियम 2006) – आबादी हेतु। | 59 |
| 19 | 5-क(ग) | वन भूमि (वनाधिकार अधिनियम 2006) – सामुदायिक वनाधिकार हेतु। | 60 |
| 20 | 6-1 | अकृषिक भूमि – जलमग्न भूमि (तालाब, नदी, नहर आदि)। | 61 |
| 21 | 6-2 | अकृषिक भूमि – स्थल, सड़कें, रेलवे, भवन और अन्य गैर-कृषि भूमि। | 62 |
| 22 | 6-3 | कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट)। | 63 |
| 23 | 6-4 | अन्य कारणों से अकृषित भूमि। | 64 |
| 24 | 7 | भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकार में हो। | 71 |
| 25 | 9 | अवैध अध्यासीन (बिना सहमति के भूमि पर अधिकार करने वाले)। | 91 |
ज़मीन के कागज़ात और इन कोड्स को समझना अपनी संपत्ति की सुरक्षा करने का पहला कदम है। खतौनी के ये कोड्स आपको धोखेबाज़ी से बचाते हैं और प्रशासन के काम को पारदर्शी बनाते हैं।
याद रखिये, सतर्क किसान ही समृद्ध किसान है!
सूचना: यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी कानूनी कार्यवाही या विवाद की स्थिति में आधिकारिक राजस्व रिकॉर्ड और कानूनी विशेषज्ञ की सलाह ही सर्वोपरि होगी।