RCCMS (Revenue Court Computerized Management System) उत्तर प्रदेश के राजस्व न्यायालयों (जमीन से जुड़ी अदालतों) का सरकारी ऑनलाइन पोर्टल है। इस वेबसाइट के जरिए यूपी का कोई भी नागरिक घर बैठे अपने मुकदमों का स्टेटस (Case Status), कोर्ट के आदेश, रोजाना की तारीखों की लिस्ट (Cause List), और जमीन के खसरा या गाटा नंबर से विवादों की जानकारी ले सकता है। इसके अलावा वरासत, दाखिल-खारिज और पैमाइश जैसे जरूरी कामों की ऑनलाइन निगरानी भी यहाँ की जा सकती है।
| पोर्टल से जुड़ी मुख्य बातें | विवरण |
| पोर्टल का नाम | RCCMS UP |
| पूरा नाम (Full Form) | Revenue Court Computerized Management System |
| कौन सा विभाग चलाता है? | राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश (Board of Revenue, UP) |
| मुख्य काम | केस का स्टेटस देखना, ऑर्डर डाउनलोड करना, कॉज लिस्ट और ऑनलाइन आवेदन को ट्रैक करना |
| किसे फायदा होगा? | जमीन के मालिकों, वकीलों, केस से जुड़े लोगों और आम जनता को |
| आधिकारिक वेबसाइट | vaad.up.nic.in |
RCCMS UP क्या है?
RCCMS का फुल फॉर्म क्या है?
RCCMS का पूरा नाम Revenue Court Computerized Management System है। हिंदी में हम इसे राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली कहते हैं।
इस पोर्टल को कौन सा विभाग चलाता है?
इस पोर्टल की देखरेख राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश (Board of Revenue, Uttar Pradesh) करता है। तकनीकी रूप से इसे नेशनल इन्फॉरमैटिक्स सेंटर (NIC) ने तैयार किया है।
इस पोर्टल को बनाने का असली मकसद क्या है?
उत्तर प्रदेश में नायब तहसीलदार, तहसीलदार, एसडीएम (SDM), एडीएम (ADM), कलेक्टर और राजस्व परिषद की अदालतों के कामकाज को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाना ही इसका मकसद है। इसके आने से कोर्ट की तारीखों में होने वाली हेराफेरी पर लगाम लगी है और लोगों को अब छोटी-छोटी जानकारियों के लिए परेशान नहीं होना पड़ता।
आम लोगों के लिए RCCMS क्यों जरूरी है?
पहले के समय में किसानों और आम लोगों को अपने केस की अगली तारीख जानने या कोर्ट के आदेश की कॉपी लेने के लिए बार-बार तहसील और वकीलों के चक्कर काटने पड़ते थे। समय भी बर्बाद होता था और पैसा भी। लेकिन अब आप अपने मोबाइल फोन से ही एक क्लिक में जान सकते हैं कि आपके केस में क्या चल रहा है।
RCCMS UP पोर्टल पर कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
इस पोर्टल पर यूपी के नागरिकों और वकीलों के लिए कई जरूरी काम ऑनलाइन कर दिए गए हैं:
- केस का स्टेटस देखना: आपका मुकदमा अभी किस स्टेज पर है और अगली सुनवाई (Next Hearing) कब है, इसकी पूरी जानकारी मिलती है।
- गाटा संख्या से विवाद का पता लगाना: किसी भी जमीन के खसरा या गाटा नंबर पर पहले से कोई कोर्ट केस चल रहा है या नहीं, यह आसानी से पता चल जाता है।
- कोर्ट के आदेश डाउनलोड करना: अदालत ने आपके केस में क्या फैसला या स्टे ऑर्डर दिया है, उसकी कॉपी डाउनलोड करना।
- दैनिक कॉज लिस्ट (Cause List) देखना: आज या आने वाली किसी तारीख को कोर्ट में कौन-कौन से मुकदमों की सुनवाई होनी है, उसकी पूरी लिस्ट देखना।
- वरासत के आवेदन को ट्रैक करना: पिता या परिवार के बुजुर्ग की मृत्यु के बाद जमीन अपने नाम दर्ज कराने (वरासत/फौती) के आवेदन की स्थिति जानना।
- दाखिल-खारिज (नामांतरण) की स्थिति: धारा 34 के तहत जमीन का म्यूटेशन कहाँ तक पहुँचा, इसकी निगरानी करना।
- जमीन की नाप-जोख (पैमाइश): धारा 24 के तहत मेड़बंदी या पैमाइश के आवेदन का स्टेटस देखना।
- जमीन का इस्तेमाल बदलना (धारा 80): खेती की जमीन को कमर्शियल या रेजिडेंशियल कराने के आवेदन को ट्रैक करना।
RCCMS में अपने केस का स्टेटस (Case Status) कैसे देखें?
वाद संख्या (Case Number) से स्टेटस देखने का आसान तरीका:
- वेबसाइट खोलें: सबसे पहले अपने फोन या कंप्यूटर पर vaad.up.nic.in खोलें।
- विकल्प चुनें: होमपेज पर आपको “वाद स्थिति (Case Status)” का एक विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।
- नंबर दर्ज करें: अपने केस का 16 अंकों वाला कंप्यूटरकृत वाद संख्या (Computerized Case Number) डालें।
- साल चुनें: अगर आप साधारण केस नंबर से खोज रहे हैं, तो साल और कोर्ट का नाम चुनें।
- स्टेटस देखें: स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड डालकर “खोजें / Submit” पर क्लिक करें। आपके केस की पूरी कुंडली सामने आ जाएगी।
स्टेटस देखते समय आपको क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
जब आप सर्च करेंगे, तो स्क्रीन पर ये चीजें दिखाई देंगी:
- वाद संख्या (पुराना नंबर और 16 अंकों वाला नया कंप्यूटर नंबर)
- अदालत का नाम (जैसे- उपजिलाधिकारी कोर्ट, मलिहाबाद)
- वादी और प्रतिवादी का नाम (जिसने केस किया और जिस पर केस हुआ)
- अगली सुनवाई की तारीख (Next Hearing Date)
- केस की वर्तमान स्थिति (जैसे- गवाही के लिए रुका है, बहस होनी है या फैसला आने वाला है)
- आदेश का विवरण (अगर कोर्ट ने कोई ऑर्डर पास कर दिया है)
गाटा संख्या से कोर्ट केस कैसे चेक करें? (सबसे जरूरी सेक्शन)
काम की बात: जमीन खरीदते या बेचते समय इस तरीके का इस्तेमाल जरूर करें। यह आपको किसी भी बड़ी धोखाधड़ी से बचा सकता है।
गाटा संख्या क्या होती है?
जैसे हमारा रोल नंबर या आधार नंबर होता है, वैसे ही राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) में जमीन के हर एक टुकड़े या प्लॉट की पहचान के लिए एक खास नंबर दिया जाता है। इसे ही उत्तर प्रदेश में गाटा संख्या या खसरा संख्या कहते हैं।
जमीन खरीदने से पहले गाटा नंबर की जांच क्यों जरूरी है?
कई बार धोखेबाज़ लोग ऐसी जमीन बेच देते हैं जिस पर भाइयों का आपसी विवाद, बंटवारे का केस या कोर्ट का स्टे (स्थगन आदेश) चल रहा होता है। अगर आप बिना जांचे ऐसी जमीन खरीद लेंगे, तो आपके पैसे भी फंस जाएंगे और आप कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ जाएंगे।
गाटा संख्या से विवादित जमीन खोजने का तरीका:
- RCCMS पोर्टल के होमपेज पर जाएं।
- वहाँ “राजस्व ग्राम सार्वजनिक खोज / गाटा वार वाद की स्थिति” वाले विकल्प पर क्लिक करें।
- अपने जिले, तहसील और गाँव का नाम चुनें।
- अब अपनी जमीन का गाटा संख्या (खसरा नंबर) डालें और ‘खोजें’ पर क्लिक करें।
- अगर उस जमीन पर कोई भी छोटा-बड़ा मुकदमा चल रहा होगा या पहले कभी चला होगा, तो उसकी पूरी लिस्ट खुल जाएगी। अगर जमीन साफ-सुथरी है, तो “कोई रिकॉर्ड नहीं मिला” लिखा आएगा।
अगर गाटा संख्या पर कोई विवाद या केस दिखे, तो क्या करें?
अगर सर्च करने पर कोई मुकदमा दिखाई दे, तो तुरंत उस केस का स्टेटस और पुराना ऑर्डर डाउनलोड करके पढ़ें। जब तक वह केस पूरी तरह खत्म न हो जाए या कोर्ट से हरी झंडी न मिल जाए, तब तक उस जमीन की रजिस्ट्री भूलकर भी न कराएं और न ही कोई एडवांस (बयाना) दें।
वादी या प्रतिवादी के नाम से केस कैसे खोजें?
नाम से खोजने (Party-Wise Search) का क्या मतलब है?
अगर आपके पास केस का नंबर (वाद संख्या) या जमीन का गाटा नंबर नहीं है, तब भी आप मुकदमे में शामिल लोगों के नाम से केस ढूंढ सकते हैं। इसे ‘पार्टी वाइज सर्च’ कहते हैं।
नाम से खोजने का तरीका:
- पोर्टल पर जाकर “वाद स्थिति -> वादी/प्रतिवादी के नाम से” वाले विकल्प को चुनें।
- अपना जिला, तहसील और कोर्ट का प्रकार (जैसे- तहसीलदार या एसडीएम) चुनें।
- वादी या प्रतिवादी का नाम हिंदी या अंग्रेजी में लिखें।
- अगर याद हो कि केस किस साल शुरू हुआ था, तो वह साल डाल दें और सर्च करें।
यह विकल्प कब काम आता है?
- जब आपको शक हो कि किसी ने आपके खिलाफ चुपके से कोई कोर्ट केस तो नहीं कर दिया है।
- जब आप अपने केस का नंबर भूल गए हों।
- जब आप किसी जमीन बेचने वाले का बैकग्राउंड चेक करना चाहते हों कि उस पर कितने केस चल रहे हैं।
RCCMS पोर्टल पर सर्च करने के अलग-अलग विकल्प
आपकी सुविधा के लिए पोर्टल पर कई तरह के सर्च ऑप्शन दिए गए हैं:
- वाद संख्या से: अगर आपके पास केस नंबर है, तो यह सबसे सटीक तरीका है।
- गाटा संख्या से: जमीन पर चल रहे मुकदमों का पता लगाने के लिए सबसे बेस्ट।
- नाम से: वादी या प्रतिवादी के नाम के आधार पर खोजने के लिए।
- पंजीकरण वर्ष से: किस साल केस दर्ज हुआ, उसके आधार पर।
- सुनवाई की तारीख से: किसी खास तारीख को कौन-कौन से केस लगे हैं, यह देखने के लिए।
- अदालत के नाम से: किसी एक जज या अधिकारी की कोर्ट के सभी मामलों को देखने के लिए।
न्यायालय का आदेश (Court Order) ऑनलाइन कैसे डाउनलोड करें?
आदेश खोजने के तरीके:
आप कोर्ट के फैसले या स्टे ऑर्डर की कॉपी इन चार तरीकों से ढूंढ सकते हैं:
- आदेश की तारीख से (किस दिन फैसला आया)
- केस नंबर से (वाद संख्या)
- अदालत के नाम से
- अधिकारी/जज के नाम से
डाउनलोड करने का आसान तरीका:
- RCCMS पोर्टल पर बने “न्यायालय आदेश (Court Orders)” वाले सेक्शन में जाएं।
- ऊपर दिए गए विकल्पों में से कोई एक चुनें (जैसे- वाद संख्या)।
- माँगी गई जानकारी और कैप्चा कोड भरकर सबमिट करें।
- आपके सामने केस की लिस्ट आएगी, जहाँ बगल में “आदेश देखें / View Order” का एक लिंक होगा। उस पर क्लिक करते ही PDF फाइल डाउनलोड हो जाएगी।
अगर ऑर्डर डाउनलोड न हो या पोर्टल पर न दिखे, तो क्या करें?
कई बार कोर्ट में फैसला तो हो जाता है, लेकिन स्टाफ उसे पोर्टल पर अपलोड करना भूल जाता है या कोई टेक्निकल एरर आ जाता है। ऐसी स्थिति में आपको अपनी तहसील की उसी कोर्ट के ‘अहलमद’ (रिकॉर्ड कीपर) से मिलना चाहिए और मैन्युअल तरीके से सर्टिफाइड कॉपी (प्रमाणित प्रति) के लिए अप्लाई करना चाहिए।
दैनिक कॉज लिस्ट (Cause List / वाद तालिका) कैसे देखें?
कॉज लिस्ट (Cause List) क्या होती है?
कॉज लिस्ट को आसान भाषा में ‘दैनिक वाद तालिका’ या कोर्ट का आज का टाइम-टेबल कह सकते हैं। इसमें लिखा होता है कि आज कोर्ट में कौन-कौन से मुकदमों की सुनवाई कितने नंबर (सीरियल नंबर) पर की जाएगी।
कॉज लिस्ट देखने का तरीका:
- पोर्टल पर जाकर “दैनिक वाद तालिका (Daily Cause List)” पर क्लिक करें।
- अपने जिले, तहसील और कोर्ट का नाम चुनें।
- जिस तारीख की लिस्ट देखनी है (जैसे आज की या कल की), वह तारीख चुनें।
- ‘शो’ या ‘प्रदर्शित करें’ पर क्लिक करते ही पूरी लिस्ट आपके सामने आ जाएगी।
वकीलों और आम लोगों के लिए यह क्यों काम की है?
इससे वकीलों और उनके मुवक्किलों को पहले ही पता चल जाता है कि उनका नंबर कब आने वाला है। इससे वे कोर्ट में सही समय पर पहुँच सकते हैं और दिनभर बैठकर इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती।
ऑनलाइन वरासत (उत्तराधिकार) की स्थिति कैसे जांचें?
वरासत क्या होती है?
जब परिवार में किसी जमीन के मालिक (खातेदार) का निधन हो जाता है, तो उनके कानूनी वारिसों (बेटे, बेटी या पत्नी) का नाम सरकारी रिकॉर्ड यानी खतौनी में चढ़ाने की प्रक्रिया को वरासत या फौती कहते हैं। यूपी में अब यह काम पूरी तरह ऑनलाइन होता है।
वरासत का स्टेटस कैसे चेक करें?
- पोर्टल पर दिए गए “उत्तराधिकार/वरासत आवेदन की स्थिति” लिंक पर क्लिक करें।
- आवेदन करते समय मिला हुआ 12 अंकों का आवेदन क्रमांक (Application ID) दर्ज करें।
- सर्च करते ही पता चल जाएगा कि आपकी फाइल लेखपाल, कानूनगो या तहसीलदार में से किसके पास रुकी हुई है।
आरसी-9 (RC-9) प्रपत्र क्या है?
जब आप ऑनलाइन वरासत के लिए अप्लाई करते हैं, तो लेखपाल मौके की जांच करके अपनी रिपोर्ट लगाता है, जिसे आरसी-9 कहते हैं। अगर इस पर कोई आपत्ति नहीं आती, तो राजस्व निरीक्षक (RI) खतौनी में नाम चढ़ाने का फाइनल आदेश जारी कर देते हैं।
अगर वरासत लंबे समय से पेंडिंग हो, तो क्या करें?
अगर ऑनलाइन स्टेटस देखने पर पता चले कि आपकी फाइल काफी समय से एक ही जगह रुकी है, तो संबंधित लेखपाल या राजस्व निरीक्षक से मिलें। अगर फिर भी काम न हो, तो आप मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर (1076) पर इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
धारा 34 दाखिल-खारिज (नामांतरण) आवेदन को कैसे ट्रैक करें?
धारा 34 क्या है?
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) से जुड़ी है। जब आप कोई जमीन खरीदते हैं (बैनामा कराते हैं), तो सरकारी कागजों में पुराने मालिक का नाम काटकर आपका नाम चढ़ाने की जो कानूनी प्रक्रिया होती है, उसे ही धारा 34 का मुकदमा कहा जाता है।
म्यूटेशन का स्टेटस ट्रैक करने का तरीका:
रजिस्ट्री होने के कुछ दिन बाद एक कंप्यूटर नंबर जेनरेट होता है। आप RCCMS के केस स्टेटस में जाकर और केस टाइप में ‘धारा 34’ चुनकर देख सकते हैं कि आपकी दाखिल-खारिज की फाइल अभी कहाँ तक पहुँची है।
दाखिल-खारिज अटकने के मुख्य कारण:
- जमीन के पुराने मालिक या किसी अन्य हिस्सेदार द्वारा आपत्ति (Objection) दाखिल कर देना।
- लेखपाल की फील्ड रिपोर्ट (आख्या) समय पर कोर्ट में न जमा होना।
- विपक्षियों को कोर्ट का नोटिस (समन) तामील न हो पाना।
धारा 24 पैमाइश (मेड़बंदी) का स्टेटस कैसे देखें?
धारा 24 क्या है?
अगर आपके पड़ोसी काश्तकार ने आपके खेत की मेड़ काट दी है या आपकी जमीन पर कब्जा कर लिया है, तो जमीन की सरकारी नाप-जोख या सीमांकन कराने के लिए धारा 24 के तहत एसडीएम (SDM) कोर्ट में अर्जी दी जाती है।
पैमाइश की प्रक्रिया और ट्रैकिंग:
इसके लिए ऑनलाइन आवेदन के साथ एक तय सरकारी फीस (चालान) जमा करनी होती है। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर कानूनगो और लेखपाल की टीम पुलिस के साथ जाकर जमीन नापती है। इस पूरे मामले की तारीखें आप RCCMS पर ट्रैक कर सकते हैं।
धारा 80 (कृषि से गैर-कृषि भूमि) की स्थिति कैसे देखें?
धारा 80 क्या है?
अगर आपके पास कोई खेती की जमीन (Agricultural Land) है और आप उस पर कोई मकान, दुकान, स्कूल, अस्पताल, मैरिज लॉन या फैक्ट्री बनाना चाहते हैं, तो उसका सरकारी स्वरूप बदलना पड़ता है। इसे ही धारा 80 की घोषणा या लैंड यूज चेंज (Land Use Change) कहते हैं।
इसका स्टेटस कैसे देखें?
धारा 80 के आवेदन की प्रगति देखने के लिए पोर्टल पर उपलब्ध ‘धारा 80 आवेदन स्थिति’ पर जाएं। यहाँ आप देख सकते हैं कि एसडीएम ने आपकी फाइल पर क्या रिपोर्ट लगाई है और आपकी कितनी सरकारी फीस जमा होनी है।
RCCMS पोर्टल पर किस-किस तरह के विवाद सुलझाए जाते हैं?
यूपी की राजस्व अदालतें मुख्य रूप से इन मामलों की सुनवाई करती हैं:
- वरासत के झगड़े: वरासत में किसी का नाम छूटने या गलत नाम चढ़ने पर।
- दाखिल-खारिज के विवाद: जमीन की रजिस्ट्री के बाद नाम चढ़ाने को लेकर आपत्तियां।
- अवैध कब्जा: ग्राम समाज या सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाना (धारा 67)।
- मेड़बंदी और सीमांकन: खेतों की सीमाओं को लेकर आपस के विवाद (धारा 24)।
- राजस्व अपील: तहसीलदार या एसडीएम के किसी फैसले से अगर आप संतुष्ट नहीं हैं, तो कलेक्ट्रेट या कमिश्नरी में उसके खिलाफ की गई अपील।
RCCMS मोबाइल ऐप: आपकी जेब में पूरी अदालत
राजस्व परिषद ने लोगों की सहूलियत के लिए इसका एक आधिकारिक मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है।
ऐप के फायदे और फीचर्स:
- तुरंत सर्च: बार-बार वेबसाइट खोलने की जरूरत नहीं, ऐप से सीधे केस स्टेटस दिखता है।
- केस सेव करें: आप अपने मुकदमों को ऐप में सेव कर सकते हैं ताकि हर बार 16 अंकों का नंबर न डालना पड़े।
- यह ऐप गाँव के किसानों के लिए बहुत सरल है, जो बिना किसी कंप्यूटर एक्सपर्ट के अपने फोन पर ही अगली तारीख देख सकते हैं।
यूपी के राजस्व न्यायालयों से जुड़े कुछ बड़े आंकड़े
उत्तर प्रदेश की डिजिटल न्याय प्रणाली कितनी बड़ी है, इसे आप इन आंकड़ों से समझ सकते हैं:
| श्रेणी | अनुमानित आंकड़े |
| यूपी में कुल राजस्व अदालतें | 2,700 से ज्यादा |
| अब तक दर्ज कुल मुकदमे | 1.2 करोड़ से अधिक |
| निस्तारित (सुलझाए गए) मामले | 95 लाख से ज्यादा |
| अभी लंबित (चल रहे) मामले | 25 लाख से अधिक |
आम समस्याएं और उनके आसान समाधान
समस्या 1: मुझे अपने केस का नंबर (वाद संख्या) नहीं मिल रहा है।
- समाधान: चिंता न करें। पोर्टल पर ‘खोजें’ विकल्प में जाएं, अपना जिला, तहसील और गाँव चुनें। वहाँ आप अपने नाम या जमीन के गाटा नंबर से भी अपना केस ढूंढ सकते हैं।
समस्या 2: कोर्ट का ऑर्डर डाउनलोड नहीं हो रहा है।
- समाधान: कभी-कभी सर्वर पर लोड होने या इंटरनेट धीमा होने से ऐसा होता है। अपने फोन के ब्राउज़र की ‘कैशे मेमोरी’ साफ करें या थोड़ी देर बाद प्रयास करें।
समस्या 3: कोर्ट में तारीख बदल गई, लेकिन ऑनलाइन पुरानी ही दिख रही है।
- समाधान: इसका मतलब है कि कोर्ट के कंप्यूटर ऑपरेटर ने अभी नया डेटा फीड नहीं किया है। इसके लिए आप अपनी कोर्ट के रीडर (अहलमद) से बात करके इसे अपडेट करवा सकते हैं।
एक जरूरी सलाह (भरोसा करने से पहले ध्यान दें)
ऑनलाइन डेटा बनाम असली रिकॉर्ड: हालांकि इंटरनेट पर दिखने वाला डेटा सरकारी सिस्टम से ही आता है, लेकिन अगर कभी ऑनलाइन जानकारी और तहसील के असली कागजों (पत्रावली) में कोई अंतर दिखे, तो हमेशा तहसील के मैन्युअल रिकॉर्ड को ही सही और अंतिम माना जाएगा। इसलिए किसी भी विवाद या जमीन की खरीद-फरोख्त के मामले में कोर्ट रूम से प्रमाणित प्रति (Certified Copy) जरूर निकलवा लें।
आधिकारिक वेबसाइट के लिंक
सटीक और सही जानकारी के लिए हमेशा इन्हीं सरकारी वेबसाइट्स पर भरोसा करें:
- राजस्व परिषद यूपी: bor.up.nic.in
- RCCMS मुख्य पोर्टल: vaad.up.nic.in
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: RCCMS का क्या मतलब होता है? Ans: इसका मतलब है Revenue Court Computerized Management System यानी राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली।
Q2: क्या मैं घर बैठे अपने केस का फैसला देख सकता हूँ? Ans: हाँ, आप वेबसाइट के ‘न्यायालय आदेश’ सेक्शन में जाकर अपने केस का फाइनल या अंतरिम ऑर्डर PDF फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं।
Q3: जमीन खरीदने से पहले गाटा नंबर चेक करना क्यों जरूरी है? Ans: ताकि आपको पता चल सके कि उस जमीन पर पहले से कोई कोर्ट केस, पारिवारिक विवाद या स्टे ऑर्डर तो नहीं है।
Q4: वरासत ऑनलाइन करने के कितने दिन बाद नाम खतौनी में चढ़ता है? Ans: अगर आवेदन पर कोई आपत्ति (Objection) नहीं आती है, तो सामान्य तौर पर 30 से 45 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
Q5: अगर ऑनलाइन रिकॉर्ड में कोई गलती दिखे तो कहाँ शिकायत करें? Ans: आप संबंधित न्यायालय के पीठासीन अधिकारी (जैसे तहसीलदार या एसडीएम) को प्रार्थना पत्र दे सकते हैं या 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर मदद ले सकते हैं।
आशा है कि यह जानकारी आपके काम आएगी। यदि जमीन-जायदाद के मामलों या इस पोर्टल से जुड़ा आपका कोई और सवाल है, तो आप नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं!
डिस्क्लेमर (सलाह): यह लेख केवल आपकी जानकारी और जागरूकता के लिए है। इसे कोई आधिकारिक कानूनी सलाह न माना जाए। जमीन से जुड़े किसी भी मामले में आखिरी फैसला लेने से पहले अपनी तहसील या कलेक्ट्रेट जाकर मूल सरकारी रिकॉर्ड का मिलान जरूर कर लें।