अगर किसी घर, दुकान या जमीन का बिजली मीटर पुराने मालिक के नाम पर है, तो आप उसे अपने नाम ट्रांसफर करवा सकते हैं। इसके लिए आपको बिजली विभाग की वेबसाइट या नजदीकी ऑफिस में एक आवेदन देना होता है। साथ में अपना आईडी प्रूफ और रजिस्ट्री या मालिकाना हक का कागज लगाना पड़ता है। विभागीय जांच के बाद मीटर आपके नाम कर दिया जाता है।
30 सेकंड में पूरी बात समझें (मुख्य बिन्दु)
- तरीका: आप ऑनलाइन घर बैठे या ऑफलाइन दफ्तर जाकर, दोनों तरह से अप्लाई कर सकते हैं।
- जरूरी कागज: आधार कार्ड, नया रजिस्ट्री का कागज और पुराना बिजली बिल।
- कब जरूरत पड़ती है: मकान खरीदने पर, पैतृक संपत्ति मिलने पर या परिवार में किसी की मृत्यु होने पर।
- कितना समय लगेगा: कागज सही होने पर 7 से 30 दिन के अंदर नाम बदल जाता है।
- खर्चा: यह आपके राज्य और कनेक्शन के लोड (kW) पर निर्भर करता है।
बिजली बिल में नाम क्यों बदलवाना पड़ता है?
सरकारी नियम के मुताबिक, बिजली बिल पर जिसका नाम लिखा होता है, वही उस कनेक्शन के लिए जिम्मेदार माना जाता है। आपको इन हालातों में नाम तुरंत बदलवा लेना चाहिए:
मकान या प्लॉट खरीदने के बाद
जब आप कोई पुराना मकान खरीदते हैं, तो रजिस्ट्री तो आपके नाम हो जाती है लेकिन बिजली का बिल पुराने मालिक के नाम ही आता रहता है। आगे चलकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने या किसी कानूनी झंझट से बचने के लिए इसे अपने नाम कराना जरूरी है।
संपत्ति विरासत में मिलने पर
अगर आपको कोई घर या जमीन वसीयत में मिली है या पारिवारिक बंटवारे में आपके हिस्से आई है, तो मालिकाना हक मिलते ही बिजली बिल भी बदलवा लें।
परिवार के किसी सदस्य के नाम से अपने नाम पर
कई बार पिता अपने रहते ही बेटे-बेटी के नाम या पति अपनी पत्नी के नाम पर मीटर ट्रांसफर करवाना चाहते हैं। यह आपसी सहमति से आसानी से हो जाता है।
पुराने मालिक की मृत्यु होने पर
अगर बिजली कनेक्शन जिसके नाम पर था उनका देहांत हो चुका है, तो उनके कानूनी वारिसों को बिजली बिल अपने नाम करवा लेना चाहिए ताकि कनेक्शन वैध रहे।
दुकान या बिजनेस खरीदने पर
कमर्शियल प्रॉपर्टी (दुकान या शोरूम) के मामले में बिजली बिल एक बड़ा सरकारी दस्तावेज होता है। इसलिए दुकान बदलते ही मीटर का नाम बदलना जरूरी है।
कौन-कौन नाम बदलवाने के लिए पात्र है? (Eligibility)
बिजली विभाग हर किसी के कहने पर नाम नहीं बदलता। आपके पास इनमें से कोई एक हक होना चाहिए:
- संपत्ति का नया मालिक: जिसके नाम पर हाल ही में रजिस्ट्री हुई हो।
- कानूनी उत्तराधिकारी: मूल उपभोक्ता की मृत्यु के बाद उनका सगा वारिस।
- सह-स्वामी: अगर संपत्ति दो या तीन लोगों के नाम संयुक्त है, तो उनमें से कोई एक।
- किरायेदार: केवल कुछ गिने-चुने राज्यों में, जहाँ मकान मालिक लिखित में इसकी इजाजत देता है।
नाम बदलवाने के लिए कौन-कौन से कागज लगेंगे?
बड़े बाबू होने के नाते आपको पते की बात बता रहा हूँ—90% आवेदन सिर्फ कागजों की कमी या गलती की वजह से रिजेक्ट होते हैं। इसलिए ये कागज पहले ही तैयार कर लें:
1. आपकी पहचान के लिए (Identity Proof)
- आधार कार्ड
- वोटर आईडी
- पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस
2. पते के सबूत के लिए (Address Proof)
- आधार कार्ड (अगर उस पर नया पता दर्ज है)
- राशन कार्ड या बैंक पासबुक
3. मालिकाना हक का सबूत (Property Proof – सबसे जरूरी)
- मकान/जमीन की रजिस्ट्री (Sale Deed)
- नगर निगम/नगर पालिका की दाखिल-खारिज (Mutation) की कॉपी
- खेती की जमीन है तो खतौनी
- वसीयत या उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate)
4. अन्य जरूरी चीजें
- Consumer Number: पुराने बिजली बिल की एक कॉपी।
- क्लियरेंस: आखिरी महीने का पूरा चुकाया हुआ बिजली बिल (कोई बकाया नहीं होना चाहिए)।
- आपकी पासपोर्ट साइज फोटो।
- NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र): पुराने मालिक या परिवार के बाकी वारिसों के दस्तखत वाला सहमति पत्र।
ऑनलाइन नाम ट्रांसफर करने का आसान तरीका (Online Process)
समय की आवश्यकता: 5 मिनट
आजकल उत्तर प्रदेश (UPPCL) समेत लगभग सभी राज्यों में यह काम ऑनलाइन हो जाता है। आप इन स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:
- वेबसाइट खोलें:
अपने राज्य की बिजली कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट (जैसे यूपी के लिए UPPCL की साइट) पर जाएं।
- सर्विस चुनें:
पोर्टल पर लॉग इन करें और ‘Consumer Services’ में जाकर Name Change / Name Transfer वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।
- बिल नंबर डालें:
अपना Consumer Number (खाता संख्या) भरें। इसे डालते ही पुराने मालिक की डिटेल दिखने लगेगी।
- कागज अपलोड करें:
फॉर्म में अपनी जानकारी भरें और मांगे गए कागज (रजिस्ट्री, आधार, फोटो) की साफ फोटो या पीडीएफ अपलोड कर दें।
- फीस भरें और सबमिट करें:
आवेदन को फाइनल सबमिट करें और जो भी ऑनलाइन प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी फीस आ रही है, उसे यूपीआई या नेट बैंकिंग से जमा कर दें।
- नंबर संभाल कर रखें:
सबमिट होने के बाद आपको एक Application Number मिलेगा, इसे कहीं नोट कर लें ताकि आगे स्टेटस चेक कर सकें।
ऑफलाइन नाम बदलवाने का तरीका (दफ्तर जाकर)
अगर आप ऑनलाइन नहीं करना चाहते, तो हमारे बिजली दफ्तर (बिजली उपकेंद्र या SDO ऑफिस) आकर भी यह काम करा सकते हैं:
- ऑफिस जाएं: अपने इलाके के बिजली विभाग के सब-डिवीजन ऑफिस जाएं।
- फॉर्म लें: काउंटर से नाम परिवर्तन (Name Change) का फॉर्म मांग लें।
- कागज लगाएं: फॉर्म को पूरा भरें, फोटो चिपकाएं और ऊपर बताए गए सभी कागजों की फोटोकॉपी साथ जोड़ दें। (साथ में ₹10 या ₹50 के स्टांप पेपर पर एक हलफनामा/Affidavit भी लगाना पड़ सकता है)।
- फीस जमा करें: कैश काउंटर पर जाकर तय फीस भरें।
- रसीद लें: बाबू से फॉर्म जमा करने की रसीद (Acknowledgement Receipt) लेना कभी न भूलें।
- वेरिफिकेशन: इसके बाद हमारे जेई (JE) साहब मौके पर आकर जांच करेंगे और फाइल आगे बढ़ा देंगे।
नाम बदलवाने में कितना खर्चा आता है?
खर्चे को लेकर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है, यह बहुत मामूली होता है:
| कनेक्शन का प्रकार | फीस का प्रकार | अनुमानित दर |
| घरेलू कनेक्शन (Domestic) | प्रोसेसिंग फीस | ₹100 से ₹500 के बीच (अलग-अलग राज्यों में थोड़ा बदलाव संभव है) |
| कमर्शियल कनेक्शन (Commercial) | प्रोसेसिंग फीस | घरेलू से थोड़ी ज्यादा होती है |
| सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security) | अंतर राशि | अगर पुराने मालिक की सिक्योरिटी ट्रांसफर नहीं हो रही है, तो नियम के मुताबिक नई सिक्योरिटी जमा करनी पड़ सकती है। |
काम की टिप: अगर पुराना मालिक लिखकर दे दे (NOC दे दे) कि उसकी जमा की हुई सिक्योरिटी राशि आपको ट्रांसफर कर दी जाए, तो आपके नए पैसे बच जाते हैं।
कितना समय लगता है?
सरकारी नियमों के मुताबिक इसके लिए एक समय तय है, जो कुछ इस तरह है:
| चरण | लगने वाला समय |
| कागजों की जांच (Document Verification) | 3 से 10 दिन |
| जेई साहब का मुआयना (Field Inspection) | 3 से 7 दिन (अगर जरूरत हुई तो) |
| बिल में नया नाम आना | अगले 1 या 2 बिलिंग साइकिल में (कुल 7 से 30 दिन) |
आपकी फाइल रिजेक्ट क्यों हो सकती है?
- कागज साफ न होना: आधार या रजिस्ट्री की धुंधली फोटोकॉपी लगा देना।
- कच्चा कागज लगाना: सिर्फ नोटरी वाले एग्रीमेंट को बिजली विभाग पक्का सबूत नहीं मानता, रजिस्टर्ड डीड जरूरी है।
- पुराना बकाया बिल: अगर पुराने बिल का एक रुपया भी बाकी है, तो कंप्यूटर फाइल आगे नहीं बढ़ने देगा। पहले पूरा बिल जमा करें।
- सहमति पत्र (NOC) न होना: अगर घर में कई हिस्सेदार हैं और बाकी भाइयों या वारिसों की एनओसी नहीं लगी है।
कुछ खास परिस्थितियां (Special Cases)
1. मकान खरीदने के बाद नाम कैसे बदलें?
रजिस्ट्री होते ही सबसे पहला काम बिजली बिल दुरुस्त कराना होना चाहिए। पुराना बिल चुकाकर, नई रजिस्ट्री की कॉपी के साथ ऊपर बताए गए तरीके से अप्लाई कर दें। इसमें आमतौर पर 15 दिन का समय लगता है।
2. जीवित पिता के नाम से अपने नाम पर ट्रांसफर
अगर पिता जी जीवित हैं और स्वेच्छा से मीटर बेटे या बेटी के नाम करना चाहते हैं, तो पिता जी का एक दस्तखत किया हुआ सहमति पत्र (NOC) और ₹100 के स्टांप पर घोषणा पत्र लगेगा।
3. मृत व्यक्ति के नाम से अपने नाम पर ट्रांसफर
अगर मूल उपभोक्ता का देहांत हो चुका है, तो आपको ये तीन कागज देने होंगे:
- उनका मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)
- तहसील या कोर्ट से बना उत्तराधिकार प्रमाण पत्र
- बाकी सगे भाई-बहनों या वारिसों की NOC (ताकि बाद में कोई विवाद न हो)।
4. क्या किरायेदार अपने नाम मीटर करवा सकता है?
साफ शब्दों में कहें तो नहीं, क्योंकि किरायेदार मकान का मालिक नहीं होता। हां, दिल्ली जैसे कुछ शहरों में अगर कमर्शियल मीटर है, तो मकान मालिक के साथ विशेष रेंट एग्रीमेंट और उसकी लिखित सहमति के आधार पर सिर्फ ‘यूजर’ के तौर पर नाम दर्ज करने की छूट मिलती है, लेकिन मालिकाना हक मकान मालिक का ही रहता है।
पुराने बकाया बिल का क्या होगा?
जरूरी नियम: बिजली विभाग में बकाया पैसा किसी व्यक्ति के नाम नहीं, बल्कि उस मकान या परिसर के नाम दर्ज होता है। इसलिए जब तक पुराना पूरा बिल जमा नहीं होगा, तब तक नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकती। मकान खरीदते समय ही पुराना बिल जरूर चेक कर लें।
अलग-अलग राज्यों में नाम बदलने का तरीका
उत्तर प्रदेश (UPPCL)
यूपी के लोग UPPCL झटपट पोर्टल पर जाकर या अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
बिहार (NBPDCL/SBPDCL)
बिहार में बिजली विभाग का ‘सुविधा ऐप’ (Suvidha App) है, जिसे मोबाइल में डाउनलोड करके आप ‘Service Request’ में जाकर नाम बदलने के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
राजस्थान (JVVNL/AVVNL/JDVVNL)
राजस्थान में ‘बिजली मित्र’ (Bijli Mitra) ऐप या वेबसाइट के जरिए यह काम घर बैठे किया जा सकता है।
दिल्ली (BSES/TPDDL)
दिल्ली में यह काम सबसे तेज और पूरी तरह डिजिटल है। आप इनकी वेबसाइट या आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर के जरिए भी कागज भेजकर हफ्ते भर में नाम बदलवा सकते हैं।
आवेदन का स्टेटस कैसे चेक करें?
- ऑनलाइन: फॉर्म जमा करते समय मिले Application Number को वेबसाइट के ‘Track Application’ वाले बॉक्स में डालकर चेक करें कि आपकी फाइल अभी बाबू के पास है या जेई साहब के पास।
- हेल्पलाइन: आप किसी भी राज्य से हों, बिजली विभाग के टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल करके भी अपने आवेदन की स्थिति जान सकते हैं।
अगर बिजली विभाग काम न करे तो क्या करें?
अगर आपके सारे कागज सही हैं, कोई बिल बाकी नहीं है और फिर भी 30 दिन से ज्यादा समय हो गया है, तो आप ये कर सकते हैं:
- बड़े अधिकारियों से मिलें: अपने सब-डिवीजन के एसडीओ (SDO) या एक्सियन (Executive Engineer) साहब से मिलकर लिखित शिकायत दें।
- ऑनलाइन शिकायत: यूपी के लोग 1912 पर या मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस पर तुरंत ऐक्शन होता है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. बिजली का मीटर अपने नाम कैसे करें?
उत्तर: अपने राज्य के बिजली पोर्टल पर ऑनलाइन जाकर या स्थानीय बिजली दफ्तर में रजिस्ट्री, आधार कार्ड और पुराना बिल जमा करके आप मीटर अपने नाम करवा सकते हैं।
Q2. नाम बदलने में कितने दिन का समय लगता है?
उत्तर: सभी कागज सही पाए जाने पर सामान्यतः 7 से 30 दिन के भीतर बिल पर नया नाम आ जाता है।
Q3. क्या बिना रजिस्ट्री के बिजली बिल में नाम बदल सकता है?
उत्तर: नहीं, बिजली विभाग मालिकाना हक के पक्के सबूत (जैसे रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज या वसीयत) के बिना नाम नहीं बदलता। सिर्फ नोटरी वाला एग्रीमेंट मान्य नहीं होता।
Q4. परिवार के किसी मृत सदस्य के नाम का मीटर कैसे बदलें?
उत्तर: उनका मृत्यु प्रमाण पत्र, अपना उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और परिवार के बाकी सदस्यों की NOC जमा करके आप मीटर अपने नाम ट्रांसफर करवा सकते हैं।
Q5. क्या पुराना बिल बकाया होने पर नाम बदल जाएगा?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। नाम बदलने के लिए पुराना बकाया शून्य (Zero) होना जरूरी है।
Q6. नाम बदलने की फीस कितनी होती है?
उत्तर: अलग-अलग राज्यों में यह ₹100 से ₹500 के बीच होती है। कुछ मामलों में सिक्योरिटी राशि का अंतर भी देना पड़ सकता है।
Q7. अगर मेरा आवेदन रिजेक्ट हो जाए तो क्या करूँ?
उत्तर: रिजेक्ट होने का कारण पता करें (जैसे कोई कागज छूट जाना या धुंधला होना), उसे ठीक करें और दोबारा अप्लाई कर दें।
Disclaimer: बिजली विभाग के नियम, जरूरी कागज और फीस अलग-अलग राज्यों या कंपनियों के हिसाब से थोड़े बदल सकते हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी स्थानीय बिजली कंपनी की वेबसाइट या दफ्तर से एक बार ताजा जानकारी जरूर मिला लें।